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Aseem
  • 12th Jan 19

  • By Aseem Singh

मेरा नाम असीम सिंह है। मैं U.P के गाजीपुर नाम के शहर का रहने वाला हूँ । मैने अपना ग्रेजुएशन सन 1999 में पूरी करी थी। तब मेरे कुछ साथियो ने मुझे बोला की तुम MBA करलो क्योकि इस डिग्री को प्राप्त करने के बाद 4-5 हज़ार की नौकरी मिल जाती है , तो मैंने उनकी यह बात सुनकर MBA करने का निर्निये लिया। MBA के दूसरे सेमेस्टर तक मैं एक औसत छात्र ही रहा, उसके बाद जब ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शुरू हुआ और मेरा इंटर्नशिप Amul कंपनी में लगा।जब मैं वहां के मैनेजर से मिला तब उन्होंने मुझ पे तंस कस्ते हुए कहा की तुम 21वि सदी की ओर बढ़ रहे हो और तुम्हे ना ही इंग्लिश आती है और ना ही कंप्यूटर चलाना आता है और तुम MBA कर रहे हो ! तुम क्या हासिल करोगे!! तो मुझे उनकी बाते बहुत चूबि और मैने उन सभी चीज़ो पर काम करना शुरू कर दिया। MBA के दौरान मुझे पूर्ण रूप से समझ आ गया था की MBA है क्या।

उसके बाद 2001 में मेरी बॉम्बे की "चैंपियन सेल्स" नाम की कंपनी में नौकरी लगी। 6 माह तक मैं बॉम्बे में रहा लेकिन मुझे वहां का वातावरण बिलकुल भी रास नहीं आया इसलिए मैने उनसे प्राथना की और उन्होंने मेरा ट्रांसफर दिल्ली करा दिया। मैने इस कंपनी में 2 साल काम किया लेकिन हमे यहाँ कुछ करना ही नहीं पड़ता था क्योकि उस कंपनी का नाम इतना बड़ा था की उनका माल अपने आप ही बिक जाता था बस हमे मार्किट में मौजूदगी दिखानी होती थी।इस कार्य में उपलब्धि की अनुभूति बिलकुल नहीं होती थी लेकिन मैंने वहां बहुत कुछ सीखा। फिर मैं ITWE नाम की कंपनी में गया , वहां मुझे विशिष्टता रासायनिक और विभाजन में नौकरी मिली, जहाँ मैंने 1 साल नौकरी करी। मैंने अपने टारगेट का 125% पूर्ण किया। वहां मैं बहुत अच्छा काम कर रहा था लेकिन मेरे बॉस की गलतफेमि की वजह से मुझे नौकरी छोड़नी पड़ी।

अगले ४ महीने तक मुझे कही नौकरी नहीं मिली लेकिन मैं ज़िद्द पर अड़ा रहा और जगह -जगह नौकरी की तलाश करता रहा। दिल्ली में रहने के लिए नौकरी तो करने ही पड़ेगी। एक दिन मेरे दोस्त ने बताया की एक mccoy silicones limited नाम की ग्रोइंग कंपनी है वहां ज्वाइन करने की कोशिश करो, प्रयतन से मुझे एक वरिष्ठ सेल्स कार्यकारी के पद पर नौकरी मिली। मैने 8 साल तक काम किया और वहां बहुत कुछ सीखा तथा आगे बढ़ने का भी मौका मिला। मैने वहां से क्षेत्रीय प्रबंधक के रूप मे कार्य छोड़ा।

फिर, AIPL Marketing Pvt. Ltd. में नेशनल सेल्स प्रबंधक के पद पर जुड़ा जो की एक नई कंपनी थी। मुझे इस कंपनी के उत्पाद बहुत अच्छे लगे। शुरुवात में मेरी टीम में केवल 40 सदस्य ही थे और सेल्स भी कम थी। कम्पनी के मालिक श्री अजित गुप्ता जी से चर्चा के दौरान यह टारगेट मिला की टीम में 100 सदस्य होने चाहिए तथा सेल भी 100 करोड़ की होनी चाहिए। सन 2013 में हमने सेल को बढ़ाया और सन 2014 में सेल को ओर आगे लेकर गए। मैने कंपनी में एक बदलाव किया था, जिसका परिणाम अच्छा साबित हुआ। हमने अपनी मास्किंग टेप की मार्केटिंग तथा प्रमोशन की गतिविधयां बढ़ाई जिसका परिणाम बेहतर तथा लाभदायक साबित हुआ। इस तरह, सही कंपनी में अपना योगदान दे कर मैने अपनी ज़िद्द को एक मुकाम दिया।

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