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jp sharma
  • 28th Dec 18

  • By JP Sharma

मेरा नाम J.P शर्मा है | मैं एक ट्रेड मार्क लॉयर हूँ | सन 1974 में स्टीफेन कॉलेज में पढ़ता था, उस दौरान नवंबर के माह में एक सोशल सर्विस का कार्य था जिसमे मुझे भी भाग लेना था | इस कार्य में मेरे अलावा 2 और थे | हमारा कार्य था नाविक गांव पहुंच कर परिक्षण उपरान्त एक स्कूल का नक्शा तैयार करना था |

ये सफर हमे जंगल के रास्ते ट्रैकिंग से पूरी करनी थी | हमें बताया गया था की हमारी सुरक्षा के लिए 4 रक्षक दिए जायेगे तथा कमिशनर साहब भी मुआयने के लिए उपलब्ध रहेंगे , किन्तु वहां पहुँच कर हमें धक्का लगा की वहां हमारे अलावा और कोई भी ना था | पर हमारा सामना एक जीव से जरूर हुआ और वो आदम खोर शेर था , जैसे की हमें समझाया गया था की डरने की कोई बात नहीं यहाँ तो परिंदा भी पर नहीं मारता , बिलकुल ठीक कहा !!! क्यूंकि शेर परिंदा तो नहीं किन्तु एक खतरनाक जानवर जरूर है | हम तीनो भयभीत होकर शेर से केवल 15 फ़ीट की दुरी पर खड़े थे, मानो जैसे मौत से सामना हो रहा था हमारा |

अधिक्रीत उच्च अधिकारियो से इस तरह का असहयोग तथा लापरवाह रवैये की कदापि उम्मीद ना थी |

इतना सब कुछ करने के बावजूद भी नक्शा बनाने का कार्य असफल रहा , और हमारी सारी मेहनत मिटटी में मिल गयी और यह प्रोजेक्ट ज्यों का त्यों ही रह गया, आज इतने सालो बाद भी इस पर कोई गौर नहीं किया गया | हम तीनो आदम खोर शेर से सामना कर जीवीत बच आये यही एक उपलब्धि रही |

यह है मेरी कहानी डर की आँखों में आँखों डाल कर देखने की | भय के आगे जीत है |

क्या है आपकी कहानी ज़िद्द की ? हमें बताएँ   +91-8448983000