Nitin
  • 24th Dec 18

  • By Nitin Swaroop

जय हिन्द भारत

मेरा नाम नितिन स्वरुप है| मैं आपको आज अपनी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसका नाम "Power of Zero" है | जीरो का महत्व क्या है यह मैंने अपनी ज़िन्दगी में सीखा |

ये उस समय की बात है जब मैं सन 2009 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहा था इसी दौरान मैंने NCC ज्वाइन किया, जिसमे मुझे एक कैंप ऑफर हुआ जिसका नाम Pera Calling Camp था इसमें तीन Catter थे | फर्स्ट राउंड Pusa मै था यह दो दिन का कैंप था इस बटालियन में 100 मेंबर थे , जिसमे 30 लेडीज थी और बाकी जेंट्स थे | पहला राउंड हमे पैदल चल कर पूरा करना था जो की अत्यंत कठिनाई भरा था पर मैं इसमें सफल हुआ, इस तरह मेरा प्रवेष दूसरे राउंड में हुआ जिसमे हमे Parasailing करना था , मैं अत्यंत भयभीत था परन्तु डर को पीछे छोड़ मैं आगे बड़ा और तीसरे राउंड में भी प्रवेश किया |

इस पड़ाव पर केवल 30 कैंडिडेट्स ही बचे थे और मैने मन में ठाना की मैं प्रथम अवश्य आऊंगा | परन्तु कुछ लोगों की सिफारिश की वजह से मुझे रिज़र्व में डाल दिया गया |

इस परिस्तिथि से मैं बेहद निराश हो गया और अंदर से मानो जैसे टूट ही गया था | मेरे मन में निराशा जनक भाव पैदा होने लगे और मैंने निश्चय किया की मेहनत का कोई फल नहीं बस यहां सिफारिश ही चलती हैं | इसी दौरान मेरी मुलाकात आर्मी में NCC के SM से हुई जिन्होंने मुझे निराश देख कर इसका कारण पूछा और जब मैंने उन्हें अपनी कहानी सुनाई तो उन सज्जन ने जिस तरह मुझे समझाया उससे मेरा जीवन ही बदल गया | उन्होंने कहा "बेटा आपने सुना है आप अगर जीरो पर हो लेकिन अगर मैं जीरो के आगे 1 लगाऊंगा तभी उसकी वैल्यू होगी आप बेशक रिज़र्व में हो लेकिन आपके रिज़र्व में होने के बावजूद भी सिलेक्टेड कैंडिडेट्स है वो आपके बिना जीरो है " और श्याद मेरी ये बात खुदा ने सुन ली ,जहां मैं सेकंड राउंड में रिज़र्व में था वहीँ मैं थर्ड राउंड में टॉप 5 में था। उनकी एक बात ने मेरी जिंदगी बदल दी। ये है मेरी कहानी ज़िद्द की।

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