Manoj Ashiwal
  • 7th Jan 19

  • By Vandan Kumar

मेरा नाम वंदन कुमार है| मैं बिहार का रहने वाला हूँ, और मैं दिल्ली अपनी पढाई करने के लिए आया था, अपनी पढाई के दौरान हमने एक अखबार में पढ़ा की ओम पूरी साहब ने बोला था की जितने भी संसद के सदस्य हैं| वह सारे बेवक़ूफ़ हैं, और कोई भी पढ़े लिखे नहीं हैं तब यह चीज़े मेरे दिमाग मे आई और हमने उसी समय से खोज बीन करना शुरू कर दिया की जितने भी संसद के सदस्य हैं, उनमे से कितने पढ़े लिखे हैं| तो हमने देखा की काफी पढ़े लिखे हैं और काफियों ने अच्छी किताबे भी लिखी हैं| तब हमने सोचा की इन सभी लोगो की किताबों का एक एक्सहिबिशन लगाते हैं, तो उसके लिए मैं जब लोगो से मिलने गया तो किसी ने हमारा साथ नहीं दिया| सबका यह कहना था की जो देश को चलाते हैं उनको आप क्या कहने जाओगे| उस समय किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया| यहाँ तक की हमारे दोस्त भी हमारे साथ मे नहीं थे| लेकिन मैं अपनी ज़िद्द पर अड़ा रहा| और एक दिन लाल कृष्ण आडवाणी जी के साथ हमारी अपॉइंटमेंट फिक्स हो गई तब हमने उनसे बात करी और उनसे हमारी बात भी बन गई की हम एक एक्सहिबिशन लगाएं| तो यह काम करते हुए हमें एक साल लगा और बाद में जाकर कहीं न कहीं वो चीज़ सफल हुई और वह इतनी सफल हुई की हमारे उस इवेंट में कुल मिलाकर 150 संसद के सदस्य आये जो की अपने आप में एक रिकॉर्ड था की इंडिया बुक रिकॉर्ड की किताब में मेरे इवेंट का नाम आया| क्योंकि सांसद के बाद सबसे ज़्यादा सांसद मेरे इवेंट में आये थे यह हमारी ज़िद्द थी और हमने इसे पूरा किया|

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